अनंत कालसर्प दोष वाले जातक को मिलने वाले प्रभाव

नमः शम्भवाय मयोभवाय नमः शंकराय    मयस्कराय नमः शिवाय शिवतराय
     अनन्त कालसर्प योग का फल व निवारण और सावधानियां  

अनन्त कालसर्प योग का फल 
कुंडली में मुख्यतः 12 प्रकार के कालसर्प दोष होते हैंप्रथम कालसर्प दोष अनंत कालसर्प दोष होता है, प्रथम भाव में राहु और सप्तम भाव में केतु हो तथा समस्त ग्रह इन दोनों के मध्य स्थित हों तब अनन्त कालसर्प योग बनता है। इस योग के कारण जातक पेट के विकारों से लगातार परेशान रहता है, मानसिक परेशानियां जातक को आये दिन व्यथित करती रहती हैं। गुप्त शत्रु परेशान करते हैं और जातक षड़यन्त्रों का शिकार होता है, प्रेत बाधा आदि दोषों से पीड़ित होता है और सरकारी अदालती मामलों में उलझना पड़ता है.  जातक की आर्थिक स्थिति बहुत ही डावाडोल रहती है, जिसके फलस्वरूप उसकी मानसिक व्यग्रता उसके वैवाहिक जीवन में भी जहर घुलने लगती है साथ ही इस योग से प्रभावित व्यक्ति साहसी, निडर, स्वतंत्र विचारों वाला और स्वाभिमानी होता है  

अनंत कालसर्प योग के उपाय
👉 अपने पास चांदी की ठोस गोली रखे 
👉 महामृत्युंजय का जाप कराएं 
👉 माह में एक बार आद्रा  स्वाती नक्षत्र में शिव का रुद्राभिषेक अवश्य किया करें
👉 शिवलिंग को चंदन युक्त धूपतेलसुगंध अथवा इत्र अर्पित किया करें 
👉 एक माला  नमः शिवाय’ अथवा शिव गायत्री-: तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् का जप अवश्य किया करें।  
👉 पहली जनवरी व चैत्र के पहले नवऱात्रे को नदी में छह नारियल प्रवाहित करें।
👉 प्रत्येक साल अपने जन्मदिन पर 3 पूजा वाले नारियल अपने ऊपर से उतारकर बहते जल में प्रवाहित करें
👉 प्रत्येक वर्ष अपने जन्मदिन पर राहु की पूजा अवश्य कराएं।
जन्म कुंडली में अनंत कालसर्प योग होने पर क्या करें क्या ना करें 
👉 किसी भी नशे जैसे बीड़ी, सिगरेट, मदिरा से हमेशा दूर रहे।
👉 कोई भी पुरानी वस्तु ये जातक खरीदें
👉 व्यापार में आप पार्टनरशिप बहुत सोच समझ कर ही करें
👉 ससुराल पक्ष से संबंध अच्छे रखें।
👉 आप कोशिश करें की आप उजले रंग की कपडे ही पहने
👉 काले नीले वस्त्र कभी ना पहने। 
👉 सोच-समझकर बुद्धि से काम लें और व्यर्थ के बोलते रहने से बचें।

कालसर्प  दोष के दुष्प्रभावों को कम करने के लिये तथा जीवन में सकारात्मक स्थिति प्राप्त करने के लिए नित्य प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण करें उसके बाद अपना मुंह पूर्व दिशा में रखें और कुशा या कपड़े के आसन पर बैठ जाएं। औरपहले गाय के घी का दिया जलाएं और एक लोटे में शुद्ध जलभरकर रखें। और मिश्री का प्रसाद रखें। तत्पश्चात भगवान शिव के समक्ष  धूप, दीप  प्रज्वलित करके रखे तत्पश्चातफलफूल, बेलपत्र  आदि के द्वारा पूजा करें और शिव चालीसा का पाठ 3,5,11 या फिर 40 बार करें।
शिव चालीसा
चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला   सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥1
भाल चन्द्रमा सोहत नीके    कानन कुण्डल नागफनी के ॥2॥
अंग गौर शिर गंग बहाये    मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥3॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे   छवि को देखि नाग मन मोहे ॥4॥
मैना मातु की हवे दुलारी   बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥5॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी   करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥6॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे   सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥7॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ   या छवि को कहि जात काऊ ॥8॥
देवन जबहीं जाय पुकारा   तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥9॥
किया उपद्रव तारक भारी   देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥10॥
तुरत षडानन आप पठायउ   लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥11॥
आप जलंधर असुर संहारा    सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥12॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई   सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥13॥
किया तपहिं भागीरथ भारी   पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥14॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं   सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥15॥
वेद नाम महिमा तव गाई।   अकथ अनादि भेद नहिं पाई  ॥16॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला   जरत सुरासुर भए विहाला ॥17॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई    नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥19॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा   जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥19॥
सहस कमल में हो रहे धारी   कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥20॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई    कमल नयन पूजन चहं सोई ॥21॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर   भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥22॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी   करत कृपा सब के घटवासी ॥23॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै   भ्रमत रहौं मोहि चैन आवै ॥24॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो   येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥25॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो   संकट से मोहि आन उबारो ॥26॥
मात-पिता भ्राता सब होई   संकट में पूछत नहिं कोई ॥27॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी   आय हरहु मम संकट भारी ॥28॥
धन निर्धन को देत सदा हीं   जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥29॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी   क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥30॥
शंकर हो संकट के नाशन    मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥31॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं   शारद नारद शीश नवावैं ॥32॥
नमो नमो जय नमः शिवाय   सुर ब्रह्मादिक पार पाय ॥33॥
जो यह पाठ करे मन लाई   ता पर होत है शम्भु सहाई ॥34॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी   पाठ करे सो पावन हारी ॥35॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई   निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥36॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे   ध्यान पूर्वक होम करावे ॥37॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा   ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥38॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे   शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥39॥
जन्म जन्म के पाप नसावे   अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥40॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी   जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥41॥
दोहा
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा तुम मेरी मनोकामनापूर्ण करो जगदीश
मगसर छठि हेमन्त ॠतुसंवत चौसठ जान अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण

शिव चालीसा का पाठ  पूरा हो  जाने के पश्चात भगवान शिव की कपूर जलाकर आरती करें और आरती करने के बाद लोटे का जल सारे घर में छिड़क दें थोड़ा  सा  जल  स्वयं  पी  लें  और मिश्री प्रसाद के रूप में खाएं, घर में भी मिश्री प्रसाद सभी को दें। 

हौं जूं सः भूर्भुवः स्वः त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव
बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् स्वः भुवः भूः सः जूं हौं ॐ।
मैं भगवान श्री शंकर जी से प्रार्थना करता हूं कि भगवान आपके ऊपर तथा आपके परिवार के ऊपर सदा अपनी कृपा बनाए रखें सदा कल्याण करें 



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