पंच रत्न 👉 सोना , चांदी , तांबा, मोती, मूंगा
पंचरत्न को लेकर ज्ञानियों में कुछ भेद है. कुछ ज्ञानियों का मानना है कि सोना, चांदी. तांबा, मोती, मूंगा पंचरत्न है और कुछ ज्ञानियों का मत है कि सोना, हीरा, मोती.पद्मराग और नीलम यह पंचरत्न है लेकिन पूजा पद्धति के अनुसार सोना, चांदी. तांबा, मोती, मूंगा पंचरत्न माने गए हैं
पंचधातु 👉 सोना, चांदी, तांबा, लोहा, रॉन्ग
पंचामृत 👉 गौदुग्ध, गौघृत , दही, शक्कर, शहद
1. दूध
दूध भगवान विष्णु को प्रिय है यह
शरीर को पुष्ट करता है ‘शरीर के
अन्दर मौजूद विष को
दूर करता है, और मन को
शांत करके तनाव दूर
करता है।
2. दही
दही पाचन तंत्र को मजबूत करता है, एकाग्रता को तो बेहतर करता है ,और
सुख की वृद्धि भी
करता है, त्वचा और
चेहरे को कांतिवान बनाने में मदद करता है।
3. मधु (शहद)
मधु हमारी शरीर में मौजूद बढ़ी हुई चर्बी को हटाता है,
आध्यात्म भाव को व
साथ ही धर्म के
प्रति झुकाव को मजबूत करता है, यही
नहीं, परिवार के लोगों के साथ संबंध भी मजबूत करता है।
4. शक्कर
शक्कर ऊर्जा के
स्तर को बनाये रखने में मदद करता है व आलस्य को कम करता है, वाणी को मधुर करता है और
अनुशासित भी रखता है।
आपकी नींद से जुड़ी समस्याएं को दूर
करता है।
5. घी
घी यह हमारे शरीर को बल
और पुष्टि देता है, हड्डियों को मजबूत बनाये रखने में भी
मदद करता है, यह
नेत्र ज्योति को भी
बनाये रखता हैं।
पंचगव्य 👉 गौमूत्र, गाय का गोबर, गौदुग्ध, गौघृत , दही (गाय के दूध से बना)
पंचपल्लव 👉 पीपल का पत्ता, आम का पत्ता, गूलर का पत्ता, बड़ का पत्ता , अशोक का पत्ता
पंच गंध 👉 केसर, कस्तूरी, हल्दी , लोंग, इलायची
पंच द्रव्य 👉 सोना, चांदी, हाथी, घोड़ा, तिलहन
पंचमेवा 👉 छुआरे, बादाम, काजू, किशमिश, सुखा नारियल
किशमिश
किशमिश का ग्लाइसेमिक और इंसुलिन इंडेक्स कम होता है। इसलिए इसके सेवन के पश्चात रक्त में शुगर का स्तर अधिक नहीं बढ़ता है। किशमिश का नियमित सेवन रक्तचाप और रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है, जिससे हृदय रोगों की आशंका कम होती है। किशमिश एसिडिटी पाचन में सहायता करती है।
बादाम
विटामिन ई और फैटी एसिड्स से भरपूर होने के कारण इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित रहता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम और पोटैशियम सामान्य रक्तदाब बनाए रखने में सहायता करते हैं। बादाम में फाइबर, प्रोटीन और अच्छी वसा काफी मात्रा में होती है, जिससे आप अतिरिक्त खाना खाने से बच जाते हैं।
छुहारा
छुहारा में भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व पाए जाते है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, शुगर, फाइबर और प्रोटीन जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। खनिजों में सिलेनियम, कॉपर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम और बोरोन और विटामिन में राइबोफ्लेविन, पाइरिडोक्सिन, नियासिन, फोलिक एसिड, विटामिन ए और विटामिन सी आदि है। यह स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने में मदद करता है. खजूर प्राकृतिक शर्करा (ग्लूकोज और फ्रुक्टोज) का एक समृद्ध स्रोत है जो उन्हें तुरंत ऊर्जा बढ़ाने के लिए एक शानदार स्नैकिंग विकल्प बनाता है। ऊर्जा और सहनशक्ति के स्तर को बढ़ाने में मदद करने के लिए सूखे फल बहुत उपयोगी होता है। रोजाना दो छुहारे का सेवन करने से शरीर में काफी देर तक ऊर्जा बनी रहती है। यह शरीर को बहुत मात्रा में प्रोटीन देता है , त्वचा को स्वस्थ बनाये रखने के लिए छुहारा बहुत फायदेमंद होता है। मांसपेशियो, हड्डियों को मजबूत बनाये रखता है।
काजू
काजू में फाइबर की मात्रा मौजूद होने से ये हमारे पाचन को सुधारने का काम कर सकता है. काजू खाने से गैस और कब्ज की समस्या से भी राहत मिल सकती है, काजू में पाए जाने वाले तत्व शरीर को मजबूत बनाने का काम करते हैं।
सूखा नारियल
नारियल का स्वाद हल्का मीठा होता है साथ ही यह काफी स्वादिष्ट भी होता है. यूं तो नारियल हर किसी के लिए फायदेमंद होता है , सूखा नारियल आयरन की कमी को दूर करता हैं.
सूखे नारियल में एंटी ऑक्सीडेंट्स की मात्रा पाई जाती है. जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है. नारियल हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है. इससे हार्ट ब्ल़ॉकेज को होने से रोका जा सकता है. सूखे नारियल को प्रेगनेंसी पीरियड में भी आसानी से खाया जा सकता है, इससे महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है. साथ ही यह आपके भ्रूण के लिए भी फायदेमंद होता है।
पंचदेव 👉 ब्रह्मा, विष्णु, महेश, शक्ति और सूर्य
पंचतत्व 👉 पृथ्वी, जल, वायु, आकाश, अग्नि
1. पृथ्वी
तत्व : इसे जड़
जगत का हिस्सा कहते हैं। हमारी देह जो दिखाई देती है वह भी
जड़ जगत का हिस्सा है और पृथ्वी भी। इसी
से हमारा भौतिक शरीर बना है, लेकिन उसमें तब तक
जान नहीं आ सकती जब तक की
अन्य तत्व उसका हिस्सा न बने। जिन
तत्वों, धातुओं और अधातुओं से पृथ्वी बनी
है उन्हीं से यह
हमारा शरीर भी बना
है।
2. जल तत्व : जल से ही
जड़ जगत की उत्पत्ति हुई है। हमारे शरीर में लगभग 70 प्रतिशत जल विद्यमान है उसी तरह
जिस तरह की धरती पर जल विद्यमान है। जितने भी
तरल तत्व जो शरीर और इस धरती में बह रहे
हैं वो सब जल
तत्व ही है। चाहे वो पानी हो,
खून हो, वसा हो,
शरीर में बनने वाले सभी तरह के
रस और एंजाइम।
3. अग्नि अत्व : अग्नि से जल
की उत्पत्ति मानी गई
है। हमारे शरीर में
अग्नि ऊर्जा के रूप
में विद्यमान है। इस
अग्नि के कारण ही
हमारा शरीर चलायमान है।
अग्नि तत्व ऊर्जा, ऊष्मा, शक्ति और ताप
का प्रतीक है। हमारे शरीर में जितनी भी गर्माहट है
वो सब अग्नि तत्व ही है। यही
अग्नि तत्व भोजन को
पचाकर शरीर को निरोगी रखता है। ये
तत्व ही शरीर को
बल और शक्ति वरदान करता है।
4. वायु तत्व : वायु के कारण ही
अग्नि की उत्पत्ति मानी गई है। हमारे शरीर में वायु प्राणवायु के रूप
में विद्यमान है। शरीर से वायु के
बाहर निकल जाने से
प्राण भी निकल जाते हैं। जितना भी
प्राण है वो सब
वायु तत्व है। धरती भी श्वांस ले
रही है। वायु ही
हमारी आयु भी है।
जो हम सांस के
रूप में हवा (ऑक्सीजन) लेते हैं, जिससे हमारा होना निश्चित है, जिससे हमारा जीवन है। वही
वायु तत्व है।
5. आकाश तत्व : आकाश एक ऐसा
तत्व है जिसमें पृथ्वी, जल, अग्नि और
वायु विद्यमान है। यह
आकाश ही हमारे भीतर आत्मा का वाहक है। इस तत्व को महसूस करने के लिए साधना की जरूरत होती है। ये आकाश तत्व अभौतिक रूप
में मन है। जैसे आकाश अनन्त है
वैसे ही मन की
भी कोई सीमा नहीं है। जैसे आकाश में कभी बादल, कभी धूल और
कभी बिल्कुल साफ होता है वैसे ही
मन में भी कभी
सुख, कभी दुख और
कभी तो बिल्कुल शांत रहता है। ये
मन आकाश तत्व रूप
है जो शरीर मे
विद्यमान है।
पंचोपचार 👉 गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य
पांच कर्मेंद्रियां 👉 हाथ,
पैर, मुंह, गुदा और
लिंग
पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ 👉 त्वचा, आँख, कान, नाक और जिव्हा आदि ।
पंचविकार 👉 काम, क्रोध, लोभ, मोह, द्वेष (अंधकार)।
पंचप्राण 👉 प्राण,अपान, समान, व्यान तथा उदान ।
पंचअपान 👉 नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त , धनंजय।
पंचांग 👉 जिस पुस्तक या तालिका में तिथि, वार, नक्षत्र, करण और योग को सम्मिलित रूप से दर्शाया जाता है उसे पंचांग कहते हैं।
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