ज्योतिष में
चंद्र ग्रह का विशेष स्थान है। चंद्रमा नौ ग्रहों के
क्रम में सूर्य के बाद
दूसरा ग्रह है। चंद्रमा जल तत्व का
प्रतिनिधित्व करता है
,चन्द्र एक
स्त्री ग्रह है। चन्द्र ग्रह कर्क राशि का स्वामी है
। वृष राशि चन्द्र की उच्च राशि है। वृश्चिक चन्द्र की नीच राशि है। चन्द्र ग्रह उत्तर-पश्चिम दिशाओं का प्रतिनिधित्व करता है। चन्द्र स्त्री ग्रह होने के कारण चन्द्र स्त्रियों व माता का सूचक है
, चंद्रमा मन का प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए चन्द्र को काल
पुरुष का मन कहा
गया है. चन्द्र ग्रह ,मन माता, शिक्षा और मस्तिष्क ,बुद्धिमता ,स्वभाव ,जननेन्द्रियों ,प्रजनन सम्बन्धी रोगों,गर्भाशय इत्यादि का कारक है। चंद्र ग्रह का 12 भावों में
सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह से
देता है।
चंद्र ग्रह के सकारात्मक प्रभाव
चंद्रमा की
सकारात्मक स्थिति से जातक को मानसिक सुखों की प्राप्ति होती है। जातक की
मनस्थिति मजबूत होती है।
वह विचलित नहीं होता है। अपने विचार व फैसलों पर
जातक संदेह नहीं करता है। साथ ही
जिस जातक का चंद्रमा उच्च का होता है, वह जातक देखने में सुंदर और आकर्षक होता है। माँ के
साथ उस जातक के
संबंध मधुर होते हैं
और माँ का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है । चंद्र ग्रह के प्रभाव के कारण जातक अपने जीवन में
सिद्धांतों को अधिक महत्व देता है।
सिद्धांतवादी होने से
वजातक सामाजिक भी होता है।, चंद्रमा के
सकारात्मक प्रभाव से जातकों की कल्पना शक्ति व स्मरण शक्ति भी मजबूत होती है। जिससे जातक की शिक्षा अच्छी होती है, और
जातक अपने जीवन में
शिक्षा का पूर्ण उपयोग करता है।
चंद्र ग्रह के नकारात्मक प्रभाव
चंद्रमा के
नकारात्मक प्रभाव से जातक मानसिक रूप से
परेशान तथा तनावग्रस्त रहता है मानसिक तनाव के कारण ही
आत्मबल की कमी हो
जाती है। जिससे उसे
सिरदर्द, डिप्रेशन, पागलपन, बेचैनी आदि की शिकायत रहती है। जातक की स्मृति शक्ति क्षीण हो जाती है। चंद्रमा के
कमज़ोर होने से जातकों को माँ का
सुख नहीं मिल पाता है। जातका माता के साथ संबंध मधुर नहीं रहते हैं। वैवाहिक जीवन में भी शांति नहीं रहती है।
जातक क्रोधी हो जाता है, जिससे वह
अपने वाणी पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। इसके कारण शत्रुओं की संख्या बढ़ने लगती है।
चंद्र ग्रह की शांति के टोटके/उपाय
(1) रात्रि के समय दूध न पिएं।
(2) चांदी की अंगूठी पहने।
(3) हमेशा अपने घर में चांदी की 1 थाली रखें।
(4) ज़रुरतमंद लोगों को जल व दूध पिलाएँ।
(5) पानी की टंकी की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
(6) गंगा,यमुना या अन्य पवित्र नदी में स्नान करें।
(7) घर की पूज्य स्त्रियों से आशीर्वाद प्राप्त करें।
(8) माता को हमेशा खुश रखें। धार्मिक स्थलों की यात्रा करते रहें
(9) अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग न करें।
(10) रात को सोते समय सिरहाने तांबे का कोई बर्तन या लोटा पानी से भरकर रखें। सुबह किसी से बात किए बिना वो पानी कांटे वाले पेड़ या पौधे में डाल दें।
(1) रात्रि के समय दूध न पिएं।
(4) ज़रुरतमंद लोगों को जल व दूध पिलाएँ।
(5) पानी की टंकी की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
(6) गंगा,यमुना या अन्य पवित्र नदी में स्नान करें।
(7) घर की पूज्य स्त्रियों से आशीर्वाद प्राप्त करें।
(8) माता को हमेशा खुश रखें। धार्मिक स्थलों की यात्रा करते रहें
(9) अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग न करें।
चंद्र की वस्तुओं का दान
चंद्र की दान
देने वाली वस्तुओं में
टोकरी (बांस की), चावल, कर्पूर, सफेद कपड़ा, मोती, चांदी, दूध, दही,
मिश्री, शकर, घी आदि दान की जा सकती
है। यह दान प्रत्येक सोमवार या पूर्णिमा के दिन
किया जा सकता है।
चंद्र ग्रहण के दिन
भी चंद्र की वस्तुओं का दान करना
लाभकारी रहता है।
चंद्र के मंत्र व दान का विवरण चंद्र
का रत्न -: मोती (Pearl)
चंद्र
गायत्री मंत्र -: ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय
विद्महे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।
चंद्र
मंत्र जाप संख्या -: 11,000 मंत्र जाप
चंद्र का तांत्रोक्त मंत्र -: ॐ श्रां श्रीं श्रौं
स: चन्द्रमसे नम:।
चंद्र
का वैदिक मंत्र -: ॐ ओम इमं देवा असपत्न सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठयाय महते जानराज्यायेनद्रस्येन्द्रियाय।इमममुष्य
पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोमी राजा सोमोस्मांक ब्राह्मणाना राजा।
चंद्र
का पौराणिक मंत्र -: दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव
सम्भवम। नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।
चंद्रमा को अर्घ्य देना के लाभ
चांदी के पात्र में पानी में थोड़ा सा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। संध्याकाल में व पूर्णिमा की रात्रि के समय चंद्रमा को अर्ध्य देना काफी लाभप्रद होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन में आ रहे समस्त नकारात्मक विचार, दुर्भावना समाप्त होती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
चांदी के पात्र में पानी में थोड़ा सा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। संध्याकाल में व पूर्णिमा की रात्रि के समय चंद्रमा को अर्ध्य देना काफी लाभप्रद होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन में आ रहे समस्त नकारात्मक विचार, दुर्भावना समाप्त होती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
चंद्र ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए तथा नकारात्मक उर्जा को कम करने के लिए उपरोक्त उपाय के साथ-साथ चंद्र स्त्रोत चंद्रदेव कवच पढ़ सकते हैं, साथ ही चंद्र देव की आरती भी कर सकते हैं।
॥चंद्र स्तोत्र ॥
श्वेताम्बर: श्वेतवपु: किरीटी, श्वेतद्युतिर्दण्डधरो द्विबाहु: ।
चन्द्रो मृतात्मा वरद: शशांक:, श्रेयांसि मह्यं प्रददातु देव: ॥1॥
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम ।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम ॥2॥
क्षीरसिन्धुसमुत्पन्नो रोहिणी सहित: प्रभु: ।
हरस्य मुकुटावास: बालचन्द्र नमोsस्तु ते ॥3॥
सुधायया यत्किरणा: पोषयन्त्योषधीवनम ।
सर्वान्नरसहेतुं तं नमामि सिन्धुनन्दनम ॥4॥
राकेशं तारकेशं च रोहिणीप्रियसुन्दरम ।
ध्यायतां सर्वदोषघ्नं नमामीन्दुं मुहुर्मुहु: ॥5॥
इति मन्त्रमहार्णवे चन्द्रमस: स्तोत्रम
चन्द्र देव कवच
श्रीचंद्रकवचस्तोत्रमंत्रस्य गौतम ऋषिः । अनुष्टुप् छंदः।
चंद्रो देवता । चन्द्रप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।
समं चतुर्भुजं वन्दे केयूरमुकुटोज्ज्वलम् ।
वासुदेवस्य नयनं शंकरस्य च भूषणम् ॥ 1 ॥
एवं ध्यात्वा जपेन्नित्यं शशिनः कवचं शुभम् ।
शशी पातु शिरोदेशं भालं पातु कलानिधिः ॥ 2 ॥
चक्षुषी चन्द्रमाः पातु श्रुती पातु निशापतिः ।
प्राणं क्षपाकरः पातु मुखं कुमुदबांधवः ॥ 3 ॥
पातु कण्ठं च मे सोमः स्कंधौ जैवा तृकस्तथा ।
करौ सुधाकरः पातु वक्षः पातु निशाकरः ॥ 4 ॥
हृदयं पातु मे चंद्रो नाभिं शंकरभूषणः ।
मध्यं पातु सुरश्रेष्ठः कटिं पातु सुधाकरः ॥ 5॥
ऊरू तारापतिः पातु मृगांको जानुनी सदा ।
अब्धिजः पातु मे जंघे पातु पादौ विधुः सदा ॥ 6 ॥
सर्वाण्यन्यानि चांगानि पातु चन्द्रोSखिलं वपुः ।
एतद्धि कवचं दिव्यं भुक्ति मुक्ति प्रदायकम् ॥
यः पठेच्छरुणुयाद्वापि सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ 7॥
॥ इति श्रीब्रह्मयामले चंद्रकवचं संपूर्णम् ॥
॥श्री
चन्द्र देव की आरती ॥
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
श्वेताम्बर: श्वेतवपु: किरीटी, श्वेतद्युतिर्दण्डधरो द्विबाहु: ।
चन्द्रो मृतात्मा वरद: शशांक:, श्रेयांसि मह्यं प्रददातु देव: ॥1॥
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम ।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम ॥2॥
क्षीरसिन्धुसमुत्पन्नो रोहिणी सहित: प्रभु: ।
हरस्य मुकुटावास: बालचन्द्र नमोsस्तु ते ॥3॥
सुधायया यत्किरणा: पोषयन्त्योषधीवनम ।
सर्वान्नरसहेतुं तं नमामि सिन्धुनन्दनम ॥4॥
राकेशं तारकेशं च रोहिणीप्रियसुन्दरम ।
ध्यायतां सर्वदोषघ्नं नमामीन्दुं मुहुर्मुहु: ॥5॥
इति मन्त्रमहार्णवे चन्द्रमस: स्तोत्रम
चन्द्र देव कवच
श्रीचंद्रकवचस्तोत्रमंत्रस्य गौतम ऋषिः । अनुष्टुप् छंदः।
चंद्रो देवता । चन्द्रप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।
समं चतुर्भुजं वन्दे केयूरमुकुटोज्ज्वलम् ।
वासुदेवस्य नयनं शंकरस्य च भूषणम् ॥ 1 ॥
एवं ध्यात्वा जपेन्नित्यं शशिनः कवचं शुभम् ।
शशी पातु शिरोदेशं भालं पातु कलानिधिः ॥ 2 ॥
चक्षुषी चन्द्रमाः पातु श्रुती पातु निशापतिः ।
प्राणं क्षपाकरः पातु मुखं कुमुदबांधवः ॥ 3 ॥
पातु कण्ठं च मे सोमः स्कंधौ जैवा तृकस्तथा ।
करौ सुधाकरः पातु वक्षः पातु निशाकरः ॥ 4 ॥
हृदयं पातु मे चंद्रो नाभिं शंकरभूषणः ।
मध्यं पातु सुरश्रेष्ठः कटिं पातु सुधाकरः ॥ 5॥
ऊरू तारापतिः पातु मृगांको जानुनी सदा ।
अब्धिजः पातु मे जंघे पातु पादौ विधुः सदा ॥ 6 ॥
सर्वाण्यन्यानि चांगानि पातु चन्द्रोSखिलं वपुः ।
एतद्धि कवचं दिव्यं भुक्ति मुक्ति प्रदायकम् ॥
यः पठेच्छरुणुयाद्वापि सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ 7॥
॥ इति श्रीब्रह्मयामले चंद्रकवचं संपूर्णम् ॥
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा…………………….
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
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