हिंदू धर्म में पूजा एवं पूजा स्थल को लेकर काफी महत्व है हिंदू धर्म में पूजा करने को आवश्यक माना गया है प्रतिदिन पूजा करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं इसलिए अधिकांश हिन्दुओं के घर में पूजन के लिए छोटे छोटे मंदिर बने होते है जहां की वो भगवान की नियमित पूजा करते है। लेकिन हममे में से अधिकांश लोग अज्ञानतावश पूजन सम्बन्धी छोटे छोटे नियमों का पालन नहीं करते है। जिससे की हमे पूजन का सम्पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
पूजा स्थल का चयन
घर में
पूजा मंदिर सदैव पूर्व, ईशान या उत्तर दिशा में होना चाहिए, इन तीनों दिशाओं में
से किसी भी एक
दिशा में यदि पूजा मंदिर बनाया जाए
तो पूजा करने का
श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है ज्ञान बुद्धि और धन का
आवागमन होता है।
घर में पूजा मंदिर सदैव पूर्व, ईशान या उत्तर दिशा में होना चाहिए, इन तीनों दिशाओं में से किसी भी एक दिशा में यदि पूजा मंदिर बनाया जाए तो पूजा करने का श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है ज्ञान बुद्धि और धन का आवागमन होता है।
घर के मंदिर में ज्यादा बड़ी मूर्ति नहीं रखनी चाहिए यदि बड़ी मूर्ति पूजा में रखनी हो तो उस मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा कराना अनिवार्य है और प्राण प्रतिष्ठा वाली मूर्ति पर प्रतिदिन प्रातः काल स्नान कराना वस्त्र बदलना पूजा अर्चना करना आरती करना, भोग लगाना भी अनिवार्य है, और सायं काल भी आरती करना, भोग लगाना अनिवार्य है । पूजा करने के लिए पत्थर, तांबा, पीतल व चांदी की मूर्ति को श्रेष्ठ माना गया है और ध्यान रखें कभी भी प्लास्टिक व फाइबर की मूर्ति का उपयोग पूजा घर में ना करें , कागज पर बने देवी देवताओं वाले चित्र भी रख सकते हैं।
पूजा मंदिर के लिए आसनध्यान रहे कि बिना
आसन के पूजा घर में कभी भी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए उसके लिए अपने घर
के पूजा मंदिर में
मूर्तियों को बिना आसन
के नहीं रखना चाहिए इसके लिए आम
की लकड़ी की चौकी पर लाल रंग
या पीले रंग का
कपड़ा बिछाकर उस पर
देवी देवताओं की स्थापित करें।
ध्यान रहे कि बिना
आसन के पूजा घर में कभी भी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए उसके लिए अपने घर
के पूजा मंदिर में
मूर्तियों को बिना आसन
के नहीं रखना चाहिए इसके लिए आम
की लकड़ी की चौकी पर लाल रंग
या पीले रंग का
कपड़ा बिछाकर उस पर
देवी देवताओं की स्थापित करें।
पूजा के लिए आवश्यक पात्र
पूजा घर
में हमेशा शुद्ध पात्र का ही प्रयोग करना चाहिए स्टील आदि अशुद्ध पात्र का नहीं।
👉 पीतल,तांबा या चांदी का लोटा ।
👉 पीतल, तांबा या चांदी का दीपक, मिट्टी का दीपक भी प्रयोग कर
सकते हैं ।
👉 पीतल या
तांबा अथवा चांदी की
थाली या प्लेट ।
👉 पीतल या
चांदी की घंटी ।
👉 तांबे का
हवन कुंड।
पूजा घर में प्रयोग की जाने वाली
👉 कुशा या
ऊन या कपड़े का
आसन ।
👉 चंदन की
लकड़ी व चंदन घिसने वाला पत्थर ।
👉 रोली, धूपबत्ती, मिश्री, पुष्प, दूर्वा, रुई,
गंगाजल, कपूर, शंख,आम की
लकड़ी व हवन सामग्री।
दैनिक कर्म विधि
सर्वप्रथम प्रातः काल उठते ही सबसे पहले अपने दोनों हाथों की हथेलियों के दर्शन करें और हथेली को अपनी आंख से लगाए, तत्पश्चात दाहिने हाथ से पृथ्वी का स्पर्श कर अपने माथे से लगाकर पृथ्वी को नमस्कार करें, उसके बाद बिस्तर से उठ कर सबसे पहले अपने माता पिता के चरण स्पर्श करें और बड़ों का अभिवादन करें और जिनके माता-पिता परमधाम को चले गए हैं वह व्यक्ति अपने मन में माता-पिता का ध्यान कर उनकी चरण वंदना कर उनको नमस्कार करें।
तत्पश्चात शौच, स्नान आदि से निर्वित होकर वस्त्र आदि पहनने के पश्चात अपने सिर को सफेद रंग की टोपी या रुमाल से ढककर माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाकर सबसे पहले अपने आसन को शुद्ध करें उस पर बैठ कर के अपने चारों तरफ गंगाजल डालें इससे चारों दिशाएं शुद्ध होंगी उसके बाद पूजा मे धूप दीप जलाकर शंख घंटा आदि बजाएं और अपने गुरु का ध्यान करके उनको नमस्कार करके पंच देव (गणेश दुर्गा शिव विष्णु और सूर्य) की पूजा करें तत्पश्चात आप जिनका भी अनुसरण करते हैं।
पंच देव पूजा निम्न प्रकार कर सकते हैं
1-: गणेश
सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है, भगवान गणेश जी पूजा के लिए हम कुछ सरल मंत्र दे रहे हैं इन मंत्र में से किसी भी एक मंत्र का आप जाप करके भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं
भगवान गणेश जी के पूजा मंत्र
ॐ गणेशाय नमः ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः सिद्धिबुद्धिसहिताय गणपतये नमः ॥
ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्
सर्वप्रथम प्रातः काल उठते ही सबसे पहले अपने दोनों हाथों की हथेलियों के दर्शन करें और हथेली को अपनी आंख से लगाए, तत्पश्चात दाहिने हाथ से पृथ्वी का स्पर्श कर अपने माथे से लगाकर पृथ्वी को नमस्कार करें, उसके बाद बिस्तर से उठ कर सबसे पहले अपने माता पिता के चरण स्पर्श करें और बड़ों का अभिवादन करें और जिनके माता-पिता परमधाम को चले गए हैं वह व्यक्ति अपने मन में माता-पिता का ध्यान कर उनकी चरण वंदना कर उनको नमस्कार करें।
तत्पश्चात शौच, स्नान आदि से निर्वित होकर वस्त्र आदि पहनने के पश्चात अपने सिर को सफेद रंग की टोपी या रुमाल से ढककर माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाकर सबसे पहले अपने आसन को शुद्ध करें उस पर बैठ कर के अपने चारों तरफ गंगाजल डालें इससे चारों दिशाएं शुद्ध होंगी उसके बाद पूजा मे धूप दीप जलाकर शंख घंटा आदि बजाएं और अपने गुरु का ध्यान करके उनको नमस्कार करके पंच देव (गणेश दुर्गा शिव विष्णु और सूर्य) की पूजा करें तत्पश्चात आप जिनका भी अनुसरण करते हैं।
1-: गणेश
सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है, भगवान गणेश जी पूजा के लिए हम कुछ सरल मंत्र दे रहे हैं इन मंत्र में से किसी भी एक मंत्र का आप जाप करके भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं
भगवान गणेश जी के पूजा मंत्र
ॐ गणेशाय नमः ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः सिद्धिबुद्धिसहिताय गणपतये नमः ॥
ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्
ॐ गणानां त्वा गणपति ग्वँग् हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपति ग्वँग् हवामहे निधीनां त्वा निधीपति ग्वँग् हवामहे वसो मम। आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्॥
2-: दुर्गा मां
दुर्गा मां जी को प्रसन्न करने के लिए तथा उनकी पूजा करने के लिए आप निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं , यदि आप सच्चे मन से मां के इन मंत्रों का जाप करते हैं , तो मां का आशीर्वाद अवश्य मिलेगा,और सुखों की प्राप्ति होगी।
दुर्गा मां जी के पूजा मंत्र
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
3-: भगवान शिव
भगवान शिव की पूजा करने के लिए व भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आप निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
भगवान शिव जी के पूजा मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।
ॐ नमो नीलकण्ठाय।
ॐ नमो नीलकण्ठाय।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च ॥
उपरोक्त मंत्र के साथ भगवान के शिव पंचाक्षर स्तोत्र का भी पाठ करने से भी शुभ फल मिलता है
भगवान विष्णु जो कि जगत के पालनहार हैं, संसार को चलाने वाले हैं, उन भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हम निम्न मंत्रों द्वारा भगवान की पूजा कर सकते हैं।
भगवान विष्णु के पूजा मंत्र
ॐ नमोः नारायणाय॥
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं, गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्।
लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं,वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम्।।
5-: सूर्य नारायण भगवान
कलयुग में सूर्य देव साक्षात रुप से विराजमान है, तथा प्रत्यक्ष दृश्य है, सूर्य देव की पूजा से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है, स्वास्थ्य सुख और सफलता प्राप्त होती है ,इसलिए सूर्य देव की उपासना करना भी अनिवार्य है सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए हम निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए, तथा सूर्य देव के समक्ष खड़े होकर के सूर्य के 12 नामों का उच्चारण करके सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
सूर्य नारायण
भगवान के पूजा मंत्र
ऊँ घृणिः सूर्याय नमः।। ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात्॥
सूर्य के इन 12 नामों का करें जाप
1- ॐ सूर्याय नम:। 2- ॐ मित्राय नम:। 3- ॐ रवये नम:।
4- ॐ भानवे नम:। 5- ॐ खगाय नम:। 6- ॐ पूष्णे नम:।
7- ॐ हिरण्यगर्भाय नम:। 8- ॐ मारीचाय नम:। 9- ॐ आदित्याय नम:।
10- ॐ सावित्रे नम:। 11- ॐ अर्काय नम:। 12- ॐ भास्कराय नम:।
तत्पश्चात जो भी आपके इष्ट देवता है उनकी पूजा करें उसके बाद आरती करने के बाद भोग लगाकर अपने आसन पर खड़े होकर 3 परिक्रमा करें अपने पितरों को सभी देवी देवताओं को नमस्कार करें ।
2-: दुर्गा मां
दुर्गा मां जी को प्रसन्न करने के लिए तथा उनकी पूजा करने के लिए आप निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं , यदि आप सच्चे मन से मां के इन मंत्रों का जाप करते हैं , तो मां का आशीर्वाद अवश्य मिलेगा,और सुखों की प्राप्ति होगी।
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
3-: भगवान शिव
भगवान शिव की पूजा करने के लिए व भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आप निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
ॐ नमः शिवाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।
ॐ नमो नीलकण्ठाय।
ॐ नमो नीलकण्ठाय।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च ॥
उपरोक्त मंत्र के साथ भगवान के शिव पंचाक्षर स्तोत्र का भी पाठ करने से भी शुभ फल मिलता है
॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥1॥
मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय, नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय, तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥2॥
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द, सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय
वृषध्वजाय, तस्मै शि काराय नमः
शिवाय ॥3॥
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य, मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय, तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥4॥
यक्षस्वरूपाय जटाधराय, पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय,तस्मै य काराय नमः शिवाय ॥5॥
पञ्चाक्षरमिदं
पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ,शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥
4-: भगवान विष्णुभगवान विष्णु जो कि जगत के पालनहार हैं, संसार को चलाने वाले हैं, उन भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हम निम्न मंत्रों द्वारा भगवान की पूजा कर सकते हैं।
भगवान विष्णु के पूजा मंत्र
ॐ नमोः नारायणाय॥
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं, गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्।
लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं,वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम्।।
5-: सूर्य नारायण भगवान
कलयुग में सूर्य देव साक्षात रुप से विराजमान है, तथा प्रत्यक्ष दृश्य है, सूर्य देव की पूजा से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है, स्वास्थ्य सुख और सफलता प्राप्त होती है ,इसलिए सूर्य देव की उपासना करना भी अनिवार्य है सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए हम निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए, तथा सूर्य देव के समक्ष खड़े होकर के सूर्य के 12 नामों का उच्चारण करके सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
ऊँ घृणिः सूर्याय नमः।। ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो भानुः प्रचोदयात्॥
सूर्य के इन 12 नामों का करें जाप
1- ॐ सूर्याय नम:। 2- ॐ मित्राय नम:। 3- ॐ रवये नम:।
7- ॐ हिरण्यगर्भाय नम:। 8- ॐ मारीचाय नम:। 9- ॐ आदित्याय नम:।
10- ॐ सावित्रे नम:। 11- ॐ अर्काय नम:। 12- ॐ भास्कराय नम:।
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जीवन दर्पण
