प्राचीन वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशानोन्मुख भूखंड की तुलना कुबेर की नगरी अलकापुरी से की गई है। जिस भूखंड का मुख्य मार्ग ईशान कोण की ओर होता है ,उसे ईशानोन्मुख भूखंड कहा जाता है । अतार्थ जिस भूखंड का मुख्य द्वार उत्तर-पूर्व दिशा के मध्य हो उसे ईशानोन्मुख भूखंड कहा जाता है । ईशान कोण का आधिपत्य भगवान शिव है। इसीलिए इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। ईशान कोण के स्वामी बृहस्पति देव और केतु ग्रह माने गए हैं। यह भूखंड ऐश्वर्य-लाभ , वंश वृद्धि, बुद्धिमान संतति ,अनेक प्रकार के शुभ फल प्रदान करने वाला बताया गया है। ईशान कोण से लाभ और ज्ञान दोनों का प्रवेश घर में रहता है । जिससे व्यक्ति सभी कार्य बुद्धिमानी से योजनाबद्ध तरीके से करता है योजनाबद्ध तरीके से किए गए काम के कारण कार्य सफलतापूर्वक होता है। कर्ज आदि से मुक्त रहता है। अष्ट दिशाओं में ईशान कोण अत्यंत महत्वपूर्ण है । यह कोण अत्यंत संवेदनशील होता है ,ईशान कोण में वास्तु दोष का कुप्रभाव सबसे अधिक होता है । यदि ईशान कोण में वास्तु दोष हो तो भवन में निवास करने वाले सभी लोगों का विकास बाधित होता है। इस कोण का सबसे अधिक प्रभाव ग्रह स्वामी और पुरुष संतान पर पड़ता है। ईशान कोण में वास्तु दोष होने से उस घर में रहने वाले लोगों की सेहत अक्सर खराब रहती है। यानी आंखे, कान और गर्दन में परेशानी होती है। और यदि घर वास्तु शास्त्र के अनुसार बना हुआ हो तो घर में सुख और धन की प्रप्ति होती है।
ईशानोन्मुख भवन बनाकर निवास करने के लिए निम्न सिद्धांत को यदि व्यवहार में लाएंगे तो निश्चित ही शुभ फल मिलेगा।
👉 भवन का मुख्य द्वार उत्तरी अथवा पूर्वी ईशान कोण में ही रखना चाहिए।
👉 ईशानोन्मुख भूखंड का ढाल पूर्व में होना चाहिए या उत्तर में होना चाहिए दक्षिण और पश्चिम में नहीं होना चाहिए।
👉 ईशान कोण में गहरा कूप अथवा गहराई तक गया हुआ हैंड पंप लगवाएं इससे बहुत अधिक शुभ परिणाम मिलेंगे ।
👉 ईशान कोण में कूड़ा कचरा आदि का ढेर ना हो यदि है तो उसको वहां से हटा दें नहीं तो शत्रुओं की वृद्धि और चरित्र हीनता का दोष लगता है।
👉 ईशान कोण दैवी ऊर्जा से भरा होता है, इसलिए ईशान को सदैव साफ सुथरा और पवित्र रखें।
👉 ईशान कोण में शौचालय ना बनवाएं यदि ईशान कोण में शौचालय बना हुआ है, तो गृह क्लेश दुश्चरित्र और व्याधियों का प्रकोप रहेगा ।
ईशानोन्मुख भूखंड में यदि वास्तु सिद्धांत व्यवहार में ना लाया गया हो तो अशुभ फल प्राप्त होता है और लेकिन कुछ उपायों के द्वारा वास्तु दोष को या वास्तु दोष से मिलने वाले कुप्रभाव को कम किया जा सकता है
👉 श्री गणेश भगवान की मूर्ति या चित्र मुख्य द्वार पर लगाएं।
👉 गाय के गोबर के दीपक बनाकर गाय के घी से मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
👉 नैऋत्य कोण की दीवार को ऊंचा करें या लोहे का एक ऊंचा डंडा लगा दे।
पूर्वमुखी घर के लिए वास्तु प्लान
पूर्व दिशा को अधिक खुला और हल्का रखने का लाभ
पूर्व दिशा की तरफ अधिक खाली स्थान का
होना आर्थिक लाभ के
साथ ही आध्यात्मिक रूप
से भी लाभदायक होता है, साथ ही
पूर्व का खुला स्थान पुत्र संतान के
लिए भी लाभकारी होता है।
सबमर्सिबल पंप का निर्माण
पूर्वमुखी घर
में सबमर्सिबल पंप अथवा अंडरग्राउंड वाटर टैंक का निर्माण करने के लिए पूर्वी ईशान [पूर्व-उत्तर-पूर्व] को बहुत अच्छा माना जाता है, इसलिये घर
में सबमर्सिबल पंप अथवा अंडरग्राउंड वाटर टैंक का निर्माण ईशान कोण में ही
कराएं।
घर की सीढ़ियां बनाने का स्थान
सीढ़ी के
लिए नैऋत्य यानी दक्षिण पश्चिम दिशा उत्तम होती है, इस दिशा में सीढ़ी होने पर घर प्रगति ओर अग्रसर रहता है, वास्तुशास्त्र के
अनुसार उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण में
सीढ़ियों का निर्माण नहीं करना चाहिए, इससे आर्थिक नुकसान, स्वास्थ्य की
हानि, नौकरी एवं व्यवसाय में समस्याओं का
सामना करना पड़ता है।
मकान का ढलान रखने का उचित स्थान
घर का
ढलान उत्तर, उत्तर-पूर्व या फिर पूर्व दिशा में रखे| इस
प्रकार का ढलान गृह
स्वामी और अन्य घर
के सभी सदस्यों के
लिए के लिए स्वास्थ्य के लिहाज से
लाभकारी होता है, अतः
घर में इस्तेमाल किया जाने वाला जल
अगल पूर्वी दिशा में
होकर बाहर निकले तो
यह बेहद अच्छा होगा।
घर में किचन निर्माण के लिए उचित स्थान
पूर्व मुखी घर
में किचन का निर्माण करने के लिए
आग्नेय [दक्षिण-पूर्व] एक
अच्छा स्थान है, अगर
यहां स्थान उपलब्ध नहीं हो तो अग्नि तत्व से संबंधित दिशा दक्षिण-दक्षिण-पूर्व [दक्षिणी-आग्नेय] में भी किचन बनाई जा सकती है, खाना बनाते समय अपना मुंह पूर्व दिशा (आग्नेय वाली किचन हो
तो) या पश्चिम दिशा (वायव्य वाली किचन हो तो) में
रखे।
स्टडी रूम बनाने का स्थान
बच्चों के पढ़ने का कमरा (स्टडी रूम) उत्तर, पूर्व
दिशा में होना चाहिए।
पूजा कक्ष के लिए उचित स्थान-
पूजा कक्ष के लिए ईशान (उत्तर-पूर्व) में पूजा स्थल बनाया जा
सकता है।
शौचालय निर्माण का उचित स्थान
दक्षिणी दिशा व नैऋत्य वायव्य कोण टॉयलेट बनाने के लिए उचित स्थान है।
