वास्तु शास्त्र अनुसार पूर्व दिशा का महत्व और प्रभाव !vastu shastra for home

वास्तु शास्त्र अनुसार पूर्व दिशा का महत्व और प्रभाव

जीवन में वास्तु शास्त्र का महत्व
वास्तु शास्त्र का हमारे जीवन में बहुत महत्व है , वास्तु मनुष्य और प्रकृति के बीच में सामंजस्य को स्थापित करने की एक कला है क्योंकि मनुष्य और प्रकृति दोनों ही पांच तत्वों पर आधारित हैं. पृथ्वी ,जल , आकाश , वायु और अग्नि (प्रकृति से तात्पर्य है संसार की समस्त जड़ एवं चेतन वस्तुएं) किसी भी वस्तु में इन पांच तत्व के असंतुलन होने से दोष उत्पन्न हो जाता है। जब तक शरीर में इन पांच तत्वों का संतुलन बना रहता है, मनुष्य स्वस्थ एवं प्रसन्नचित्त रहता है। साथ ही उसका बौद्धिक संतुलन भी अच्छा बना रहता है जिससे मनुष्य अपने जीवन में उचित निर्णय लेकर सुख समृद्धि प्राप्त करता है।  परंतु संतुलन बिगड़ने से स्वास्थ्य खराब रहता है।  मानसिक  शारीरिक परेशानियां घेर लेती हैं साथ ही बुद्धि विचलित हो जाती है। ठीक इसी प्रकार जिस स्थल पर हम निवास करते  हैं , उस स्थान  पर भी  पंच  तत्वों  का समावेश  होता है यदि  उनका  उचित संतुलन ना हो तो प्राणी मानसिक तनाव, गृहक्लेश, कामकाज, व्यापार आदि से परेशान रहता है और उचित संतुलन वाले घर मे निवास करने वाला प्राणी  सदैव प्रसन्न रहता  हैं, जिसके कारण मानसिक  तनाव  से मुक्त रहता है इससे वह मनुष्य  उचित अनुचित का  विचार करके सही निर्णय  ले कर के सुखी खुशहाल जीवन  व्यतीत करता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा का जीवन पर प्रभाव
वास्तु शास्त्र में दिशाओ और दिशाओ के मिलने से बनने वाले कोणों का विशेष महत्व है। वास्तुशास्त्र के नियमों का निर्धारण दिशाओं एवं पंच तत्व के आधार पर ही किया जाता है। दिशाएँ चार होती हैं -पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण, और इन चारों दिशाओं को मिलने से बनने वाले कोणों को विदिशा कहा जाता है। यह विदिशायें भी चार होती हैं पूर्व दिशा एवं दक्षिण दिशा को मिलाने वाले कोण को आग्नेय कोण कहा जाता है , दक्षिण दिशा एवं पश्चिम दिशा को मिलाने वाले कोण को नैऋत्य कोण कहा जाता है, पश्चिम दिशा एवं उत्तर दिशा को मिलाने वाले कोण को वायव्य कोण कहा जाता है. तथा उत्तर दिशा और पूर्व दिशा को मिलाने वाले कौन को ईशान कोण कहा जाता है।
इस ब्लॉग में हम केवल पूर्व दिशा के वास्तु दोष के विषय में जानेंगे
प्रात: काल जिस दिशा में सूर्य उदय होता है वह दिशा पूर्व दिशा कहलाती है, इस दिशा के प्रतिनिधि देवता सूर्य हैं। पूर्व दिशा अग्नि तत्व को प्रभावित करती है यह पितृ स्थान की भी सूचक है, हमारी उर्जा के सबसे बड़े स्त्रोत सूर्य की किरणे पूर्व दिशा से ही आती है, यह दिशा मानव सहित अन्य सभी  जीवों को जीवन शक्ति प्रदान करती है, आध्यात्मिक रूप से भी हमेशा से ही इस दिशा का विशेष महत्व रहा है, इसीलिए वास्तु शास्त्र में भी इसे एक पवित्र दिशा का दर्जा प्राप्त है ,वास्तु के अनुसार केवल वे ही घर सर्वश्रेष्ठ होते है, जो कि वास्तु के नियमों के अनुरूप बने हो, फिर चाहे वो पूर्व मुखी हो या दक्षिण मुखी, लेकिन फिर भी कही कही पूर्व मुखी घर सामान्य रूप से एक अच्छा विकल्प माना जाता है, पूर्वाभिमुख घर के अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने के लिए अपना मकान वास्तु शास्त्र के अनुसार बनाएं और इसके लिए किसी वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही अपना मकान बनाए।
पूर्वाभिमुख वास्तु दोष होने से उत्पन्न होने वाली परेशानियां
पूर्व दिशा को बंद कर देने से सूर्य की किरणों का घर में प्रवेश बाधित हो जाता है, इसलिए ऐसे भवन में निवास करने से भिन्न भिन्न प्रकार की व्याधियां उत्पन्न हो जाती हैं, ऐसे भवन में निवास करने वाले हैं मनुष्यों के मान सम्मान में हानि होती है, उस पर कर्ज का बोझ निरंतर ही बढ़ता रहता  है, सदैव जीवन में पितृदोष बना रहता है मांगलिक कार्य में बाधा जाती हैं, कामकाज, व्यापार , में व्यक्ति को बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, कभी-कभी तो यह परेशानी इतनी ज्यादा बढ़ जाती है, कि व्यक्ति को अपना मकान तक बदलना पड़ जाता है, या बेच देना पड़ जाता है, व्यक्ति का अधिकांश पैसा बीमारी में खर्च होता है, लगातार अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैंइसलिए भवन के मुख्य दरवाजा को अधिकांश इसी दिशा में बनाने का सुझाव दिया जाता है, जिससे कि सूर्य की रोशनी हवा की उपलब्धता भवन में पर्याप्त मात्रा में रहती है।
पूर्व दिशा में उपस्थित वास्तु दोष के कारण
👉 पूर्व दिशा में भारी समान रखने से पूर्व दिशा का वास्तु दोष उत्पन्न होता है। यदि दक्षिण और पश्चिम से पूर्व की दिशा ऊंची बनाई हुई है तो भी पूर्व दिशा का वास्तु दोष उत्पन्न होता है।
👉 पूर्व दिशा में शौचालय, सेप्टिक टैंक, स्टोर रूम, रसोईघर बनाने से भी पूर्व दिशा का वास्तु दोष उत्पन्न होता है
👉 मुख्य दरवाजे पर बाहर की ओर तांबे के सूर्य या सूर्य का चित्र लगाएं 
👉 पूर्व दिशा की ओर लाल रंग का झंडा लगाएं 
👉 पूर्व दिशा में कूड़ा कचरा आदि  रखें।
👉पूर्व दिशा में लाल रंग का बल्ब लगाएं।
👉पूर्व दिशा में कूड़ा-करकट, कचरा आदि या जूता चप्पल रखने का स्थान बनाने से भी पूर्व दिशा का वास्तु दोष उत्पन्न होता है।
👉पूर्व दिशा को दक्षिण दिशा की अपेक्षा ऊंचा रखने से भी पूर्व दिशा का वास्तु दोष उत्पन्न होता है।
पूर्व दिशा में ध्यान रखने योग्य बात-: मकान बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पूर्व दिशा की दीवारें, दक्षिण और पश्चिम की तुलना में थोड़ी छोटी और पतली होनी चाहिए। पूर्व दिशा में भारी समान ना रख करके हल्का समान रखते हैं। शौचालय, सेफ्टी टैंक, रसोई पूर्व दिशा में ना बनाएं  कूड़ा करकट जूता चप्पल रखने का स्थान पूर्व दिशा में ना बनाएं पूर्व दिशा में पूजा घर बनाना शुभ माना गया है।
पूर्व दिशा में उपस्थित वास्तु दोष के अशुभ प्रभाव को दूर करने के उपाय   
👉मुख्य दरवाजे पर गहरे लाल रंग का पेंट कराएं।
👉वास्तु दोष की पूजा कराएं 
👉 सूर्य यंत्र को विधिवत पूजा करके मुख्य दरवाजे पर अंदर की ओर लगाएं। 
👉सूर्य को नियमित रूप से जल दें।
👉 मुख्य दरवाजे पर बाहर की ओर रक्त चंदन या रोली से प्रत्येक रविवार के दिन स्वास्तिक अवश्य   बनाएं। 








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