हिंदू पंचांग के अनुसार धनतेरस का त्योहार हर
वर्ष कार्तिक माह के
कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है, धनतेरस जिसे धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं
पांच दिवसीय दीपावली का
पहला दिन होता है।
धनतेरस के दिन से
दिवाली का त्योहार प्रारंभ हो जाता है,
मान्यता है इस तिथि पर आयुर्वेद के
जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रगट हो हुए थे,
इसी कारण से हर
वर्ष धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा निभाई जाती है।
कहा जाता है जो
भी व्यक्ति धनतेरस के
दिन सोने-चांदी, बर्तन, जमीन-जायजाद की
शुभ खरीदारी करता है
उसमें तेरह गुना की
बढ़ोत्तरी होती है,धनतेरस पर
सोने-चांदी की चीजें, बर्तन, झाड़ू और
धनिया आदि खरीदना बहुत शुभ
माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन
कुछ चीजों की खरीदारी करना अशुभ माना जाता है।
धनतेरस पर क्या वस्तु ना खरीदें
स्टील से बनी वस्तुएं-: धनतेरस के दिन
बहुत से लोग स्टील के बर्तन घर
ले आते हैं, जबकि इन्हें खरीदने से
बचना चाहिए. स्टील शुद्ध धातु नहीं है.
इस पर राहु का प्रभाव भी ज्यादा होता है. आपको सिर्फ प्राकृतिक
धातुओं की ही खरीदारी करनी चाहिए. मानव निर्मित धातु में से केवल पीतल खरीदा जा सकता
है।
प्लास्टिक का सामान- धनतेरस पर
कुछ लोग प्लास्टिक की बनी चीजें घर ले आते हैं. बता दें कि प्लास्टिक बरकत नहीं देता
है. इसलिए धनतेरस पर प्लास्टिक से बना किसी भी तरह का सामान घर न लेकर आएं।
एल्यूमिनियम से बनी वस्तुएं-: धनतेरस पर कुछ लोग
एल्यूमिनियम के बर्तन या सामान भी
खरीद लेते हैं. इस
धातु पर भी राहु का प्रभाव अधिक होता है. एल्यूमिनियम को दुर्भाग्य का सूचक माना गया है. त्योहार पर एल्यूमिनियम की कोई
भी नई चीज घर में लाने से बचें।
कांच के बर्तन- धनतेरस पर कुछ लोग
कांच के बर्तन या दूसरी चीजें खरीदते हैं. कांच का संबंध राहु से माना जाता है, इसलिए
धनतेरस के दिन इसे खरीदने से बचना चाहिए. इस दिन कांच की चीजों का इस्तेमाल भी नहीं
करना चाहिए।
नुकीली व धारदार वस्तुएं-: धनतेरस के दिन धारदार
वस्तुएं खरीदने से बचें. इस दिन चाकू, कैंची, पिन, सूई या कोई धारदार सामान खरीदने
से सख्त परहेज करना चाहिए . धनतेरस पर इन चीजों को खरीदना शुभ नहीं माना जाता
है।
लोहे से बनी वस्तुएं-: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लोहे
को शनिदेव का कारक माना जाता है. इसलिए लोहे से बनी चीजों को धनतेरस पर भूलकर भी खरीदने
की गलती न करें।
चीनी मिट्टी के बर्तन- धनतेरस पर
सेरामिक (चीनी मिट्टी) से बने बर्तन या गुलदस्ता आदि खरीदना से बचना चाहिए. इन चीजों
में स्थायित्व नहीं रहता है, जिससे घर में बरकत की कमी रहती है. इसलिए सेरामिक से बनी
चीजें बिल्कुल न खरीदें।
काले रंग की चीजें- धनतेरस के दिन काले
रंग की चीजों को घर लाने से बचना चाहिए. धनतेरस एक बहुत ही शुभ दिन है, जबकि काला रंग
हमेशा से दुर्भाग्य का प्रतीक माना गया है. इसलिए धनतेरस पर काले रंग की चीजें खरीदने
से बचें।
खाली बर्तन घर ना लाएं- धनतेरस के
दिन यदि आप कोई
बर्तन या इस्तेमाल करने का सामान खरीदने की योजना बना
रहे हैं तो ध्यान रखें कि उसे
घर में खाली न
लेकर आएं. घर में
बर्तन लाने से पहले इसे पानी, चावल या किसी दूसरी सामग्री से भर
लें।
धनतेरस 23 अक्टूबर 2022 दिन रविवार तिथि प्रारंभ
22 अक्टूबर त्रयोदशी तिथि प्रारंभ-: सायंकाल 6 बजकर 03 मिनट से
23 अक्टूबर त्रयोदशी तिथि समाप्त -: सायंकाल 06 बजकर 04 मिनट तक
23 अक्टूबर 2022 दिन
रविवार को त्रयोदशी तिथि सूर्योदय से
लेकर सायंकाल 06 बजकर 04 मिनट तक रहेगी, अतः नए
सामान की खरीदारी करना 23 तारीख में शुभ
माना जाएगा ।
नोट-: धनतेरस अपने आप
में ही एक शुभ
मुहूर्त है, इसलिए नि:संकोच पूरा दिन आप
सामान की खरीदारी कर
सकते हैं ।
धन्वन्तरि देव के पूजन का शुभ मुहूर्त
धनतेरस मुहूर्त: -: शाम 05 बजकर 34 मिनट से लेकर शाम
के 06 बजकर 04 मिनट तक
शुभ मुहूर्त की कुल अवधि-: कुल अवधि 29 मिनट कि रहेगी
धनतेरस पर धन्वन्तरि देव का पूजन
अच्छे स्वास्थ्य के लिए, आरोग्य प्राप्ति के लिये और अच्छे जीवन के लिये धनतेरस के दिन भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले धन्वन्तरि जी की
पूजा में आपको भगवान धन्वन्तरि की मूर्ति या तस्वीर, लकड़ी की चौकी, धूप,
मिट्टी का दीपक, रूई,
गंध, कपूर, घी, फल,
फूल, मेवा, मिठाई और
भोग के लिये प्रसाद, ये सारी चीज़ें चाहिए होंगी ।
परंपराओं के अनुसार आज
सात धान्यों को भी
पूजा में रखा जाता है। सात धान्य में गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ,
चावल और मसूर शामिल हैं।
घर के
ईशान कोण, यानि उत्तर-पूर्व दिशा के
कोने को अच्छे से
साफ करें और वहां पर लकड़ी की
चौकी बिछाएं। अब उस
चौकी पर एक लाल
रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर
भगवान धन्वन्तरि की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें, साथ ही
श्री गणेश भगवान की
भी तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। लकड़ी की चौकी की
उत्तर दिशा में एक
जल से भरा कलश
स्थापित करें और उस
कलश के ऊपर चावल से भरी कटोरी रखें।
अब उस
कलश के मुख पर
कलावा बांधे और रोली से स्वास्तिक का
चिन्ह बनाएं । इस
प्रकार मूर्ति और कलश
स्थापना के बाद भगवान का आह्वान करना चाहिए। फिर सबसे पहले गणेश जी
की और फिर भगवान धन्वन्तरि की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पहले गणेश जी
और धन्वन्तरि जी को
रोली-चावल का टीका लगाएं । उन्हें गंध, पुष्प अर्पित करें, साथ ही
फल और मिठाई चढ़ाएं । इसके बाद
भगवान को भोग अर्पित करें।
भोग के
लिए दूध, चावल से
बनी खीर सबसे अच्छी मानी जाती है
। फिर भोग लगाने के बाद धूप,
दीप और कपूर जलाएं और भगवान की
आरती करें ।
धन्वन्तरि देव जी की आरती
ओ३म् जय धन्वंतरि देवा, जय
धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख
देवा।
ओ३म् जय धन्वंतरि देवा……….
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर
दूर किए।
ओ३म् जय धन्वंतरि देवा……….
आयुर्वेद बनाया, जग में
फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का,
साधन बतलाया।
ओ३म् जय धन्वंतरि देवा……….
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।
ओ३म् जय धन्वंतरि देवा……….
तुम को जो नित
ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।
ओ३म् जय धन्वंतरि देवा……….
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास
खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।
ओ३म् जय धन्वंतरि देवा……….
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर
गावे।
रोग-शोक न आए,
सुख-समृद्धि पावे।
ओ३म् जय धन्वंतरि देवा……….
