धर्म शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास में सबसे प्रमुख काम दीप
दान करना बताया गया
है। इस महीने में
दीपक को जलाकर उसे
किसी भी देवस्थान पर
रखना अथवा पीपल के
वृक्ष के नीचे रखना, गंगा आदि नदियों में प्रवाहित करना, दीपदान कहलाता है,
यह दीपदान प्रभु के
समक्ष अपनी मनोकामना तथा
अपने पितृ आदि की
मुक्ति के लिए निवेदन प्रकट करने का
एक धार्मिक तरीका है।
किन-किन स्थानों पर दीपदान कर सकते हैं
1. किसी भी
देवमंदिर में दीपदान कर
सकते हैं।
2. किसी भी
विद्वान ब्राह्मण के घर
में दीपदान कर सकते हैं।
3. गंगा आदि
नदियों में या नदी
के किनारे दीपदान कर
सकते हैं।
4. दुर्गम स्थान अथवा पीपल के
वृक्ष के नीचे दीपदान कर सकते हैं।
दीपदान कैसे करना चाहिए
मिट्टी अथवा आटे के छोटेसे दीपक बनाकर उसमें थोड़ा सा तेल डालकर पतली सी रुई की बत्ती जलाकर उसे पीपल या बढ़ के पत्ते अथवा धान के उपर पर रखकर नदी में प्रवाहित किया जाता है। साथ ही अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए पितृ आदि की सद्गति के लिए भगवान विष्णु से और गंगा जी मैया से प्रार्थना करके अनादि का दान करके दीपदान किया जाता है।
नोट-: यदि समीप बहता जल (गंगा, नदी) नहीं है तो किसी भी देवस्थान पर या पीपल के वृक्ष के नीचे भी दीप दान कर सकते हैं, दीपों की संख्या और बत्तियां खास समयानुसार और मनोकामना अनुसार तय होती है।
क्यों करना चाहिए दीपदान दीपदान
के फायदे
1. अकाल मृत्यु से बचने के
लिए दीपदान करते हैं ।
2. अपने मृतकों की सद्गति के
लिए दीपदान करते हैं ।
3. लक्ष्मी माता और भगवान विष्णु को प्रसन्न कर
उनकी कृपा हेतु दीपदान करते हैं ।
5. यम, शनि,
राहु और केतु के
बुरे प्रभाव से बचने के लिए दीपदान करते हैं ।
6. सभी तरह
के अला-बला, गृहकलह और संकटों से
बचने के लिए दीपदान करते हैं ।
7. जीवन से
अंधकार मिटे और उजाला आए इसीलिए दीपदान करते हैं ।
8. मोक्ष प्राप्ति के लिए दीपदान करते हैं ।
9. किसी भी
तरह की पूजा या
मांगलिक कार्य की सफलता हेतु दीपदान करते हैं
।
10. घर में
धन समृद्धि बनी रहे
इसीलिए भी दीपदान करते हैं
।
11. कार्तिक माह
में भगवान विष्णु या
उनके अवतारों के समक्ष दीपदान करने से
समस्त यज्ञों, तीर्थों और
दानों का फल प्राप्त होता है, इसीलिए भी
दीपदान करते हैं ।
