इस वर्ष पंचाग के अनुसार गृहस्थ लोगों के
लिए 6 सितंबर के दिन
कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखना बहुत ही
शुभ रहेगा. क्योंकि इस वर्ष 30 साल बाद कृष्ण जन्माष्टमी पर तिथि, गृह, नक्षत्र का
अद्भुत व दुर्लभ संयोग से जयंती नामक योग बन रहा,
भविष्य पुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष मे
अष्टमी तिथि को बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र मे एवं
वृषभ राशि के चंद्रमा मे अर्ध रात्रि 12 बजे हुआ था
और इस वर्ष 30 साल
बाद 6 सितंबर 2023 को
जन्माष्टमी पर दोपहर 3 बजकर 37 मिनट पर अष्टमी तिथि के साथ बुधवार का दिन रोहिणी नक्षत्र एवं वृषभ राशि के चंद्रमा विद्यमान है, इससे पुण्य प्रदायक जयंती नामक योग बन
रहा है गौतमी तंत्र में भी
इस संबंध में लिखा गया है कि
भाद्रपद कृष्ण जन्माष्टमी यदि
रोहिणी नक्षत्र और सोम
या बुधवार से संयुक्त हो जाएं तो
वो जयंती नाम से
विख्यात होती है तथा
ऐसा योग जन्म-जन्मान्तरों के पुण्य संचय से
मिलता है. जिस मनुष्य को जयंती उपवास का सौभाग्य मिलता है, उसके जन्म-जन्मान्तरों के पाप
नष्ट हो जाते हैं
यह जयंती व्रत अन्य व्रत की अपेक्षा विशिष्ट फल प्रदान करने वाला होता है।
जन्माष्टमी 2023 पूजा का शुभ मुहूर्त
6 सितंबर
2023,कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा का
समय - रात्रि 11.57 से
12:42 तक रहेगा,
पूजा
अवधि - 46 मिनट की रहेगी
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व्रत और त्यौहार
