ज्योतिष अनुसार डिप्रेशन दूर करने के उपाय


डिप्रेशन
क्या है, और ये  और क्यों होता
है

डिप्रेशन के बहुत से कारण है, लेकिन डिप्रेशन का जो मुख्य कारण है , वो मै सरल शब्दों में बताता हूं, कि व्यक्ति की मानसिकस्थिति, मनस्थिति एवं बाहरी परिस्थिति के बीच जो असंतुलन उत्पन्न हो जाता है, इसके कारण वह व्यक्ति इन  परिस्थिति के बीच सामंजस्य नहीं बना पाता हैं और सामंजस्य बनने के कारण तनाव उत्पन्न होता है। और जब तनाव अधिक हो जाता है, तो व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। 
दूसरे शब्दों में कहा जाए तो डिप्रेशन उस व्यक्ति को होता है जो हमेशा तनाव में रहता है। कम बोलता है और मित्रों के साथ परिवार वालों के साथ कम घुलता-मिलता है मिलता है।  ऐसे मे जिस स्थिति पर उसका नियंत्रण नहीं रहता वह तनाव महसूस करने लगता है, यह हमारे मस्तिष्क और शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और यह कब अवसाद (Depression) में बदल जाता है।
हार्मोन बदलाव के कारण डिप्रेशन की समस्या बनती है जैसे रजोनिवृत्ति (Menopause), प्रसव, थायरॉइड की समस्या आदि।
डिप्रेशन होने के और कौन-कौन से कारण हो सकते हैं आइए जानें
डिप्रेशन होने के बहुत सारे कारण होते हैं, जिनका बारे में विस्तार से जान लेना ज़रूरी होता है। चलिये इसके बारे में चर्चा करते हैं-
1 जीवन में जब भी कोई बड़ी घटना हो जाती है, या कोई बड़ा परिवर्तन होता है, जैसे लंबे समय तक बीमार रहना, किसी दुर्घटना का होना, कोई प्रिय वस्तु का खो जाना, या किसी प्रियजन व्यक्ति की मृत्यु का हो जाना या उसका खो जाना अथवा व्यापार में बहुत ज्यादा आर्थिक नुकसान होना आदि अनेक गंभीर दुर्घटना अवसाद (Depression) का कारण बनती है।
2 कुछ मामलों में अवसाद का कारण अनुवांशिकी भी हो सकता है। यदि परिवार में पहले से यह समस्या रही हो अगली पीढ़ी को यह होने की आशंका बढ़ जाती है
3 इस समय बदलती हुई जीवन शैली के कारण भी अवसाद की समस्या पैदा होती है, क्योंकि आज के बदलते समय में देर रात तक जागना, मोबाइल चलाना, घंटों मोबाइल लेकर एकांत में बैठना, इन सब के कारण हमारे सोने का समय और उठने का समय दोनों ही अनियंत्रित हो जाते हैं, जिसके कारण कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं इन बीमारियों में एक बीमारी डिप्रेशन भी है।
डिप्रेशन की पहचान क्या है इसके लक्षण क्या है आइए जाने
डिप्रेशन लक्षण क्या है
(1) लगातार थकावट और कमजोरी का महसूस करना।
(2) हमेशा अशांत एवं अस्थिर रहना।
(3) मूड का उतार-चढ़ाव (मूड स्विंग्स) का होना
(4) एकाग्र रहने तथा फैसले लेने में कठिनाई होना।
(5) अधिक नींद का आना, या बहुत कम आना
(6) बारबार मृत्यु या आत्महत्या के विचार आना।
(7) बैचैनी या आलस्य महसूस होना।
(8) चिड़चिड़ापन बहुत अधिक होना।
(9) अचानक से वजन बढ़ना या कम होना।
(10) हमेशा चिंताग्रस्त उदास रहना
डिप्रेशन एक मानसिक समस्या है लेकिन यह हमारे मस्तिष्क और शरीर दोनों पर ही नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे निम्न प्रकार के लक्षण दिखाई देते है।
ज्योतिष अनुसार डिप्रेशन की समस्या का कारण
ज्योतिष अनुसार डिप्रेशन का कारण जातक की कुंडली में उपस्थित खराब ग्रह होते हैं। जो कि जातक के जीवन में बहुत ज्यादा खराब हालात पैदा करतें है, जिससे जातक डिप्रेशन की समस्या शिकार हो जाता है। आइए जानते हैं कि वह खराब ग्रह और योग कौन से हैं, जिससे कारण जातक डिप्रेशन शिकार हो जाता है।
चंद्र ग्रह के कारण डिप्रेशन की समस्या के योग
जातक की कंडली में चंद्रमा कमजोर-निर्बल अस्त हो तो जातक डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। यदि जातक की कुंडली में चन्द्र ग्रहण (चंद्रमा की राहु अथवा केतु के साथ युति ) योग बना हुआ हों, या चंद्रमा को राहु अथवा केतु प्रभावित कर रहे हो या कुंडली में कही भी चंद्रमा पर राहु अथवा केतु की द्रष्टि हो तो भी जातक डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। क्योंकि चंद्रमा मन का कारक होता है। और जब मन की बात पूरी नही हो पाती है, तो मनस्थिति डाँवाडोल हो जाती है, जो डिप्रेशन की समस्या का कारण बन जाती है।
बुध ग्रह के कारण डिप्रेशन की समस्या के योग
जातक की कुंडली में बुध ग्रह भी डिप्रेशन की समस्या पैदा करता है, यदि कुंडली में बुध ग्रह निर्बल स्थिति में अस्त हो या गुरु से पीड़ित तो जातक डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। बुध और चंद्रमा एक साथ हो और दोनों ही ग्रह कमजोर हो तो गंभीर डिप्रेशन की समस्या बन जाती है। जातक की कुंडली में यदि जड़त्व है जो कि बुध+राहु की युति कारक बनता है डिप्रेशन की समस्या पैदा करता है।
राहु ग्रह के कारण डिप्रेशन की समस्या के योग
जातक की कुंडली में यदि राहु खराब हो या राहु कंडली के 12वें घर में हो तो जातक को राहु मानसिक परेशानियां और अनिद्रा देता है, भारी नुकसान और घाटे देता है, झूठे आरोप भी लगवाता है। पुलिस कोर्ट कचहरी अस्पताल के चक्कर लगवाता है। जिससे जातक मानसिक चिंताओं से घिरा रहता है और डिप्रेशन में चला जाता है। राहु के इस डिप्रेशन में जातक आत्महत्या की चरमसीमा तक जा सकता है।
मंगल ग्रह के कारण डिप्रेशन की समस्या के योग
मंगल के कमजोर होने के कारण भी जातक मानसिक रोगी हो जाता है। क्योंकि मंगल साहस का कारक होता है। मंगल के अस्त होने या खराब से जातक के साहस में कमी आती है, जिससे जातक एकांतप्रिय हो जाता है। एकांतप्रिय होने के कारण जातक डिप्रेशन डिप्रेशन शिकार हो सकता है।
ज्योतिष अनुसार डिप्रेशन की समस्या का निवारण
(1) चांदी में बनी हुई मोती की अंगूठी धारण करें
(2) डिप्रेशन से पीडि़त व्यक्ति चांदी के गिलास में प्रतिदिन अवश्य पानी पिये। 
(3) डिप्रेशन से पीडि़त व्यक्ति को रात में दूध पीना जहर समान है। इसलिए रात के समय दूध कभी भी पिएं।  
(4) रात को सोते समय सिरहाने तांबे का कोई बर्तन या लोटा पानी से भरकर रखें। सुबह किसी से बात किए बिना वो पानी कांटे वाले पेड़ या पौधे में डाल दें।
(5) छोटी कन्याओं को मिठाई और फल देते हुए उनके पैर छू कर उनका आशीर्वाद लें।
(6) हर रंग के प्रयोग से बचें, और अपने घर में भी कभी चौड़े  पत्ते वाले पेड़ पौधे ना लगाएं
(7) 96 दिन के लिए अपनी नाक का छेदन कराकर उसमे सोना या चांदी अवश्य पहने
(8) किसी नदी या नहर में लगातार 43 दिनों तक तांबें का छेद वाला एक सिक्का जल प्रवाह करें
(9) चांदी की डिब्बी में केसर घोलकर अपने माथे पर टीका लगाए
(10) रसोई में बैठकर ही भोजन करें, काले,नीले और हरे रंग कपड़े ना पहने।
नोट-: यदि आप डिप्रेशन की समस्या से पीड़ित हैं, और आपके पास आपकी अपनी जन्म कुंडली है, या जन्म का समय तिथि आदि है, तो आप हमसे कॉमेंट या कांटेक्ट-अस के द्वारा संपर्क कर सकते हैं।

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