बुध ग्रह -: प्रशासनिक
पद प्राप्त करने के लिए बुध ग्रह का भी बहुत बड़ा योगदान है, क्योंकि बुध ग्रह व्यक्ति
को अत्यंत बुद्धिमान व तार्किक क्षमता तथा हाजिर जवाबी और तत्काल निर्णय लेने में सक्षम बनाता है,
यदि कुंडली में बुध शुभ और उच्च के बैठे हो तो ऐसा जातक वार्तालाप द्वारा बड़ी से बड़ी
समस्याओं को हल करने में सक्षम होता है।
बृहस्पति ग्रह-: ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को शिक्षा का कारक माना गया है. यदि कुंडली में बृहस्पति शुभ या उच्च राशि के हैं तो अच्छी शिक्षा प्राप्त होती है और अच्छी शिक्षा का सिविल सर्विस में विशेष महत्व है, बृहस्पति ग्रह मजबूत होने से व्यक्ति उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। आईएएस की परीक्षा में हर विषय से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं, जिन्हे हल करने में बृहस्पति की अहम भूमिका होती है।
आइए जानते हैं ज्योतिष अनुसार डिप्रेशन दूर करने के उपाय
कुंडली में कौन-कौन से शुभ योग प्रशासनिक पद प्राप्त कराते हैं ।
👉 मेष लग्न के जातक की कुंडली में सूर्य और बुध पंचम भाव में तथा बृहस्पति नवम भाव में बैठे हो तो जातक सिविल सर्विस में उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनता है।
👉 वृषभ लग्न के जातक की कुंडली में बुध-सूर्य पंचम भाव में साथ हो एवं उन पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो तो वह जातक भी सिविल सर्विस में उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनता है।
👉 यदि कुंडली में सूर्य उच्च का हो और भाग्य स्थान में उच्च का गुरु हो तो उच्च प्रशासनिक पद मिलता है।
👉 सिंह लग्न के जातक की कुंडली में यदि और गुरु पंचम में तथा सूर्य-बुध नवम भाव में हो अथवा सूर्य-बुध लग्न में हो व गुरु नवम भाव में हो तब वह आईएएस बनाता है।
👉 यदि जातक की कुंडली के अंदर बुधादित्य योग है स्वराशि अथवा मित्र राशि (मेष,मिथुन, सिंह या कन्या राशि ) में बने तो यह योग प्रशासनिक अधिकारी बनाने में सहयोगी होता है।
👉 वृश्चिक लग्न के जातक की कुंडली में यदि गुरु पंचम भाव में व सूर्य दशम में, बुध एकादश भाव में हो तो उच्च प्रशासनिक पद मिलता है।
👉धनु लग्न के जातक की कुंडली में गुरु लग्न में हो, सूर्य नवम में में हो तो यह योग जातक को प्रशासनिक पद प्राप्त करता है।
👉 मीनलग्न के जातक की कुंडली में यदि गुरु लग्न में हो या नवम भाव में सूर्य लग्न में हो या नवम भाव में तथा बुध द्वितीय भाव में हो व मंगल नवम में हो तो यह योग आईएएस बनता है।
👉 जिन जातकों की जन्म कुंडली में बुधादित्य योग, राजयोग, मालव्य योग, लक्ष्मी योग, उभय-चारिक योग, विशिष्ट वैभव योग, सम-योग , शौर्य योग, गजकेसरी योग, इनमें से यदि कोई भी दो या तीन या इससे अधिक योग भी विद्यमान हो जाए तो ऐसे जातक को कलेक्ट्रेट बनने से कोई नहीं रोक सकता
कुंडली में कौन-कौन से भाव प्रशासनिक अधिकारी बनाने
में सहयोग करते हैं ।
प्रथम भाव: प्रशासनिक पद प्राप्त करने के लिए कुंडली का प्रथम(लग्न) भाव का प्रबल होना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि कुंडली के प्रथम भाव को शरीर बल, स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता, रूप, मष्तिष्क, आकृति, प्रकृति, स्वभाव, आयु, आत्मा, आत्मविश्वास, सम्मान, प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा, यश, तेज़, आदि का कारक माना गया है।
द्वितीय भाव: द्वितीय भाव वाणी का भाव भी है। इस भाव का प्रबल होना ज़रूरी है क्योंकि वाणी की शक्ति व्यक्ति को उच्च पद प्राप्त करने में मदद करती है।
तीसरा भाव: कुंडली का तीसरा भाव साहस और कड़े परिश्रम को दर्शाता है। इस भाव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि हर सफलता पूर्ण समर्पण और कड़ी मेहनत पर निर्भर करती है।
पंचम भाव: पांचवा घर या भाव बौद्धिकता और उच्च शिक्षा से संबंधित है। इसलिए आईएएस और आईपीएस जैसे महत्वपूर्ण पद हासिल करने के लिए इसका प्रबल होना ज़रूरी है।
षष्ठ भाव: किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने के लिए कुंडली में षष्ठ भाव मज़बूत स्थिति में होना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए छठे और दसवें घर का संबंध भी बहुत महत्वपूर्ण है। प्रशासनिक क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति की सफलता इन घरों की मज़बूत स्थिति, इनके स्वामी. कुंडली में इनकी शुभ व अशुभ स्थिति पर निर्भर करती है।
